कोरोना वायरस (coronavirus) प्राकृतिक नहीं है?
जापान के वैज्ञानिक तासुकु होंजो का दावा -
टोक्यों 24 अप्रैल (इंट) चिकत्सा के क्षेत्र में जीतने वाले जापान की वैज्ञानिक professor doctor तासुकू होंजो ने दावा किया कि वायरस प्राकृतिक नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक होता तो पूरी दुनिया में यूं तबाही नहीं मचाता क्योंकि विश्व के हर देश में अलग अलग टेंपरेचर होता है। यदि यह कोरोना वायरस प्राकृतिक होता तो चीन जैसा अन्य देश, जहां चीन जैसा टेंपरेचर है वहां दबंगई मचाता।
जिस तरह स्विजरलैंड जैसे ठंडे देशों में खेल रहा है उसी तरह रेगिस्तानी इलाकों में भी फैल रहा है यदि यह प्राकृतिक होता और ठंडे स्थानों पर फैलता तो गर्म स्थानों पर जाना दम तोड़ देता।
मैंने अनेक जीव- जंतु और वायरस पर 40 साल तक रिसर्च की है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह वायरस प्राकृतिक नहीं है, यह वायरस बनाया गया है और यह वायरस पूरी तरह से आर्टिफिशियल।
चीन की मुहॖं लेबोरेटरी में मैंने 4 साल तक काम किया है। उस लेबोरेटरी के सभी स्टाफ से मैं परिचित हूं।
कोरोना हादसे के बाद से मैं सबको फोन लगा रहा हूं परंतु सभी में
बर्स के फोन 3 महीने से बंद आ रहे हैं अब पर चल रहा है कि सारे technician की मौत हो चुकी है मेरी बातें सत्य होगी, अगर गलत हुई तो सरकार मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले सकती है। मैं आज तक की अपनी जानकारी और रिसर्च के आधार पर 100%
दावे के साथ कह सकता हूं कि यह और ना ही चमगादड़ से फैला है यह चीन ने बनाया है। जो मैं आज बोल रहा हूं यदि यह बात आज या मेरे मरने के बाद भी झूठी हो तो मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले सकते हैं परंतु मैं एक बार फिर कह रहा हूं कि चीन झूठ बोल रहा है और यह सच्चाई एक दिन सबके सामने आएगी ।
टोक्यों 24 अप्रैल (इंट) चिकत्सा के क्षेत्र में जीतने वाले जापान की वैज्ञानिक professor doctor तासुकू होंजो ने दावा किया कि वायरस प्राकृतिक नहीं है।
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जिस तरह स्विजरलैंड जैसे ठंडे देशों में खेल रहा है उसी तरह रेगिस्तानी इलाकों में भी फैल रहा है यदि यह प्राकृतिक होता और ठंडे स्थानों पर फैलता तो गर्म स्थानों पर जाना दम तोड़ देता।
मैंने अनेक जीव- जंतु और वायरस पर 40 साल तक रिसर्च की है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह वायरस प्राकृतिक नहीं है, यह वायरस बनाया गया है और यह वायरस पूरी तरह से आर्टिफिशियल।
चीन की मुहॖं लेबोरेटरी में मैंने 4 साल तक काम किया है। उस लेबोरेटरी के सभी स्टाफ से मैं परिचित हूं।
कोरोना हादसे के बाद से मैं सबको फोन लगा रहा हूं परंतु सभी में
बर्स के फोन 3 महीने से बंद आ रहे हैं अब पर चल रहा है कि सारे technician की मौत हो चुकी है मेरी बातें सत्य होगी, अगर गलत हुई तो सरकार मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले सकती है। मैं आज तक की अपनी जानकारी और रिसर्च के आधार पर 100%
दावे के साथ कह सकता हूं कि यह और ना ही चमगादड़ से फैला है यह चीन ने बनाया है। जो मैं आज बोल रहा हूं यदि यह बात आज या मेरे मरने के बाद भी झूठी हो तो मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले सकते हैं परंतु मैं एक बार फिर कह रहा हूं कि चीन झूठ बोल रहा है और यह सच्चाई एक दिन सबके सामने आएगी ।

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